सीएसआईआर की महत्वपूर्ण उपलब्धियां

आई.आई.पी मोहकमपुर में भारतीय पेट्रोलियम संस्थान के 63वें स्थापना दिवस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

देहरादून, 14 अप्रैल (हि.स.)। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में जीवाश्म ईंधन से नवीकरणीय ईंधन की सीएसआईआर की महत्वपूर्ण उपलब्धियां ओर बढ़ने की यात्रा में भारतीय पेट्रोलियम संस्थान का अहम योगदान रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदूषण की रोकथाम और प्रबंधन क्षेत्रों सीएसआईआर की महत्वपूर्ण उपलब्धियां में भी संस्थान के वैज्ञानिक तेजी से कार्य करेंगे।

गुरुवार को आईआईपी मोहकमपुर में भारतीय पेट्रोलियम संस्थान के 63वें स्थापना दिवस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रतिभाग करते हुए यह बातें कहीं। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुखद संयोग है कि आज बैसाखी, भगवान महावीर जयंती, डा.भीमराव अम्बेडकर जयंती और सीएसआईआर-भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (आईआईपी) स्थापना दिवस है। इस दौरान उन्होंने सर्वप्रथम भारत रत्न बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री ने आईआईपी द्वारा किये जा रहे विभिन्न कार्यों की प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।

शोध के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां

मुख्यमंत्री ने कहा कि आईआईपी के वैज्ञानिकों ने शोध के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। जिसमें प्लास्टिक से डीजल बनाने और जहाजों के लिए बायोफ्यूल बनाने जैसी महत्वपूर्ण उपलब्धियां शामिल हैं।

आईआईपी वैश्विक महामारी के दौरान भगीरथ प्रयास और सेवा से जन-जन के लिए उपयोगी कार्यों सहित अभिनव अनुसंधान और प्रौद्योगिकी के लाभ का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। संस्थान ने पूरे भारतवर्ष में 108 ऑक्सीजन संयंत्र स्थापित किए हैं, जिसमें उत्तराखंड वासियों की सेवा में अल्मोड़ा, चमोली, देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल,रुद्रप्रयाग, टिहरी गढ़वाल और ऊधमसिंह नगर सहित 08 संयंत्र स्थापित किए गए हैं। जिससे इन जनपदों के 100 से अधिक चिकित्सालय लाभान्वित हुए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के तीव्र विकास के लिए संस्थानों एवं विभागों की भूमिका भी अहम हो जाती है। आईआईपी राज्य के 10 सीमान्त विकासखण्डों को एडाप्ट कर उनके विकास में योगदान के बारे में सोचने को कहा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आईआईपी देहरादून देश का एक मात्र बायोजेट ईंधन निर्माता है। वर्ष 2018 में देहरादून से दिल्ली तक की भारत की पहली बायोजेट ईंधन प्रचालित उड़ान में इसी बायोजेट ईंधन का प्रयोग किया गया था। पांच केन्दीय मंत्रियों की ओर से इस बायोजेट ईंधन उड़ान के दिल्ली आगमन पर स्वागत किया गया। उत्तराखंड के युवाओं की कौशल वृद्धि एवं आजीविका के बेहतर अवसर के लिए संस्थान की ओर से अनेक कार्य किये जा रहे सीएसआईआर की महत्वपूर्ण उपलब्धियां हैं।

मुख्यमंत्री ने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि आईआईपी के वैज्ञानिक वानाग्नि, फलों-सब्जियों के भंडारण एवं परिवहन और वाहनों एवं डीजल जेनसेट से होने वाले प्रदूषण की रोकथाम एवं प्रबंधन क्षेत्रों में भी तेजी से कार्य करेंगे।

इस मौके पर निदेशक,सीएसआईआर-आईआईपी डा.अंजन रे,निदेशक आर सीएसआईआर की महत्वपूर्ण उपलब्धियां एंड डीआईओसीएल डा.एसएसवी रामकुमार, पूर्णिमा अरोड़ा,दुर्गेश पंत,सोमेश्वर पांडेय एवं संस्थान के वैज्ञानिक, अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

सीएसआईआर-केपीआईटी ने हाइड्रोजन ईंधन सीएसआईआर की महत्वपूर्ण उपलब्धियां सीएसआईआर की महत्वपूर्ण उपलब्धियां सेल से लैस कार को प्रदर्शित किया

सीएसआईआर-एनसीएल के निदेशक प्रोफेसर अश्विनी कुमार नांगिया ने स्वदेशी सीएसआईआर- एनएमआईटीएलआई प्रौद्योगिकी के उपयोग और उद्योग साझेदार के तौर पर केपीआईटी के साथ मिलकर हाइड्रोजन ईंधन सेल से चलने वाली अपनी पहली कार को सफलतापूर्वक तैयार करने के लिए टीम को बधाई देते हुए कहा , ‘ अब समय आ गया है कि देश में परिवहन के लिए हाइड्रोजन आधारित नवीकरणीय ऊर्जा का ईंधन के रूप में इस्‍तेमाल किया जाए। यह न केवल पेट्रोल , डीजल के आयात बिल को कम करेगा , बल्कि हाइड्रोजन सबसे स्वच्छ ईंधन है जो केवल पानी का उत्‍सर्जन करता है। एनएमआईटीएलआई के तहत उमदा ऊर्जा क्षेत्र में सीएसआईआर का दीर्घकालिक निवेश अब फलीभूत हुआ है। ‘

किसानों की समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करें: नायडू ने सीएसआईआर से कहा

नयी दिल्ली, 26 सितंबर (भाषा) उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने रविवार को वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) से कहा कि वह खुद को नये अंदाज में पेश कर भविष्य की ओर बढ़े तथा किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए नये नवाचार, तकनीक और समाधान पेश करे।नायडू ने यहां सीएसआईआर के 80वें स्थापना दिवस समारोह में सीएसआईआर प्रयोगशालाओं और संस्थानों से उन चुनौतियों का समाधान करने का आग्रह किया जिनके लिए दीर्घकालिक वैज्ञानिक और तकनीकी समाधान की आवश्यकता होती है।नायडू ने सीएसआईआर से कृषि अनुसंधान पर अधिक ध्यान देने और किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए नये नवाचार,

नायडू ने यहां सीएसआईआर के 80वें स्थापना दिवस समारोह में सीएसआईआर प्रयोगशालाओं और संस्थानों से उन चुनौतियों का समाधान करने का आग्रह किया जिनके लिए दीर्घकालिक वैज्ञानिक और तकनीकी समाधान की आवश्यकता होती है।

नायडू ने सीएसआईआर से कृषि अनुसंधान पर अधिक ध्यान देने और किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए नये नवाचार, तकनीक और समाधान पेश करने के लिए कहा। उन्होंने जलवायु परिवर्तन, दवा प्रतिरोध, प्रदूषण, महामारी और महामारी के प्रकोप जैसी चुनौतियों का जिक्र किया जिन पर वैज्ञानिक समुदाय को ध्यान देने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि कोविड -19 महामारी एक आकस्मिक संकट है, इसके अलावा कई अन्य चुनौतियां हैं। उन्होंने कहा कि सीएसआईआर जैसे संस्थानों को किसी भी अचानक और अप्रत्याशित समस्या को दूर करने के लिए तैयार रहने की जरूरत है।

नायडू ने कहा, ‘‘सीएसआईआर की प्रत्येक प्रयोगशाला को नयी अनुसंधान परियोजनाओं पर एक स्पष्ट रूपरेखा के साथ आना चाहिए जो विभिन्न चुनौतियों का समाधान करे और मानवता के बड़े हित में योगदान करने की कोशिश करता है।"

उन्होंने कहा कि भारत ने विज्ञान की दुनिया में अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, महासागर विज्ञान और रक्षा अनुसंधान में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

उन्होंने उल्लेख किया कि भारत में अनुसंधान और विकास में उद्योगों द्वारा निवेश नगण्य है, नायडू ने कॉरपोरेट और उद्योगों से प्रमुख वैज्ञानिक संस्थानों के साथ घनिष्ठ संबंध बनाने, महत्वपूर्ण अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं की पहचान करने और उनमें निवेश करने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा, ‘‘इससे न केवल वित्तपोषण को बढ़ावा मिलेगा बल्कि गुणवत्ता और नवाचार दोनों में सुधार होगा।’’

महामारी के खिलाफ लड़ाई में धैर्य और दृढ़ संकल्प के साथ देश की लड़ाई का नेतृत्व करने के लिए वैज्ञानिक और चिकित्सा बिरादरी की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि सीएसआईआर के वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने समाधान विकसित करने के लिए अथक प्रयास किया - चाहे वह निदान हो, टीके हों, दवाएं, अस्थायी अस्पताल और चिकित्सा सहायक उपकरण हों।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत दुनिया में सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान लागू कर रहा है। उन्होंने कहा कि टीके की 85 करोड़ खुराक देना एक उल्लेखनीय उपलब्धि है।

उन्होंने कहा कि यह काफी हद तक भारत के स्वदेशी टीके, कोवैक्सीन और भारत में निर्मित कोविशील्ड जैसे अन्य टीकों से सुगम हुआ। युवा वैज्ञानिक पुरस्कार प्रदान करने वाले उपराष्ट्रपति ने स्कूली बच्चों के लिए सीएसआईआर इनोवेशन अवार्ड सहित विभिन्न पुरस्कारों के विजेताओं की सराहना की।

इस अवसर पर बोलते हुए, केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि वह चाहते हैं कि सीएसआईआर और सभी विज्ञान विभाग विचार-मंथन करें और अगले दस वर्षों में आवश्यक विज्ञान और प्रौद्योगिकी नवाचारों का एक खाका तैयार करें, यदि भारत को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी रहना है तो।

जमशेदपुर : सीएसआईआर एनएमएल ने मनाया 73वां स्थापना दिवस समारोह

एनएमएल ने समारोह में उद्योग व शिक्षा जगत के महत्वपूर्ण संस्थानों के साथ किया समझौता.

Jamshedpur (Vishwajeet Bhatt) : सीएसआईआर राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला ने शनिवार को अपना 73वां स्थापना दिवस मनाया. सभागार में उपस्थित सभी लोगों को संविधान की शपथ दिलाने के बाद कार्यक्रम की शुरुआत की गई. एनएमएल के निदेशक (सीएसआईआर) डॉ. एके श्रीवास्तव ने स्वागत भाषण दिया और सीएसआईआर- एनएमएल की स्थापना वर्ष 1950 से लेकर देश के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विकास में इसके योगदान के बारे में बात सीएसआईआर की महत्वपूर्ण उपलब्धियां की. उन्होंने सीएसआईआर राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला को सीएसआईआर द्वारा स्थापित प्रारम्भिक संस्थानों में से एक बताया. उन्होंने कहा कि 21 नवंबर 1946 को सी. राजगोपालाचारी ने औपचारिक रूप से इसका उद्घाटन किया तथा पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 26 नवंबर 1950 को इसे राष्ट्र को समर्पित किया गया था. डॉ. अरविंद सिन्हा, सलाहकार प्रबंधन ने मुख्य अतिथि का दर्शकों से परिचय कराया.

पर्यावरण हितैषी तकनीक का विकास समय की जरूरत : टीएन

मुख्य अतिथि आईआईटी पटना के निदेशक प्रोफेसर टीएन सिंह थे. उन्होंने लोक कल्याणकारी और पर्यावरण हितैषी तकनीकी के विकास पर वैज्ञानिकों का ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि आज भारत के शोधार्थियों को ग्रीन ऊर्जा पर गहराई से काम करने की आवश्यकता है. आज छोटे-छोटे शहर में पर्यावरण प्रदूषण की समस्या गहरी होती जा रही है. जीरो कार्बन उत्सर्जन मैनेजमेंट तथा प्लास्टिक मुक्त पर्यावरण आज समय की मांग है. अतः हम सभी को मिलकर ग्रीन ऊर्जा, सोलर ऊर्जा आदि के विकास और प्रयोग द्वारा भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में गहनता से कार्य करने की आवश्यकता है. यह गौरव की बात है कि सीएसआईआर राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला ई-वेस्ट मैनेजमेंट पर पूरी सक्रियता से कार्य कर रहा है और जीरो कार्बन उत्सर्जन की दिशा में भी ठोस पहल की जा रही है. यह प्रयोगशाला मेटल और मिनरल के क्षेत्र में एशिया का सबसे प्राचीन और गौरवशाली संस्थान रहा है और देश के विकास में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है. उच्च स्ट्रेंथ और संक्षारण रहित स्टील के विकास द्वारा देश में गुणवत्तायुक्त बहुमंजिली मजबूत इमारतों को खड़ा किया जाने लगा है. सीएसआईआर एनएमएल का गौरवशाली अतीत हमेशा भारत के विकास को नयी ऊंचाई तक पहुंचाने की प्रेरणा देता रहा है.

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तकनीकी व गैर-तकनीकी क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान के लिए बच्चे पुरस्कृत

वर्ष 2021 में तकनीकी और गैर-तकनीकी क्षेत्रों में उनके उत्कृष्ट योगदान के साथ- साथ मेधावी कर्मचारियों के बच्चों को उनकी विभिन्न उपलब्धियों हेतु मुख्य अतिथि द्वारा कई पुरस्कार प्रदान किए गए. वर्ष 2021 के दौरान पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ लाइसेंस प्राप्त या व्यावसायीकृत प्रौद्योगिकी के लिए वीए अल्टेकर पुरस्कार सर्वश्रेष्ठ पेपर प्रकाशन के लिए बीआर निझावन पुरस्कार, सर्वश्रेष्ठ संगोष्ठी वक्ता के लिए प्रो. एसपी मेहरोत्रा पुरस्कार और सर्वश्रेष्ठ इन हाउस परियोजना के लिए प्रो. शीलोभद्र बनर्जी पुरस्कार प्रदान किए गए. वर्ष 2021 के दौरान तकनीकी, गैर तकनीकी श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ कर्मचारी के लिए प्रो. पी. रामचंद्र सीएसआईआर की महत्वपूर्ण उपलब्धियां राव पुरस्कार तथा विभिन्न श्रेणियों में एनएमएल स्टाफ के बच्चों को कई मेधावी पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया.

शैक्षणिक संस्थानों के साथ समझौतों पर हस्ताक्षर

इस अवसर पर सीएसआईआर एनएमएल ने भविष्य के अनुसंधान एवं विकास क्षेत्रों में सहयोगी अनुसंधान करने और वर्तमान और सीएसआईआर की महत्वपूर्ण उपलब्धियां भविष्य की औद्योगिक अनुसंधान एवं विकास समस्याओं को हल करने हेतु उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए. अकादमिक सीएसआईआर की महत्वपूर्ण उपलब्धियां सहयोग के लिए आईआईटी पटना और आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के साथ संयुक्त छात्र सलाह बढ़ाने और पारस्परिक हित की संयुक्त अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं को शुरू करने हेतु समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए. इस सहयोग का उद्देश्य संयुक्त सेमिनार, सम्मेलन, कार्यशालाओं का आयोजन करने के साथ-साथ छात्रों को उनके उच्च अध्ययन हेतु उपलब्ध अत्याधुनिक उपकरणों तक बेहतर पहुंच को प्रदान करना है. यह भारत सरकार के अंतर्गत कौशल युक्त भारत के उद्देश्यों को भी पूरा करेगा. उद्योग भागीदारों के अंतर्गत आर. सारंगपानी, मुख्य महाप्रबंधक एनटीपीसी, नई दिल्ली, डॉ. अमित चटर्जी मुख्य अनुसंधान एवं विकास अधिकारी वेदांता प्राइवेट लिमिटेड, सर्वेदु सान्याल, मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी, जेएमआईपीओएल (जमशेदपुर) और ललित वशिष्ठ, सीईओ और संस्थापक दिवा एनविटेक, मुंबई ने भी सीएसआईआर एनएमएल के साथ पारस्परिक हित के विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए, ताकि नए समाधान खोजे जा सकें. वेदांता प्राइवेट लिमिटेड और सीएसआईआर एनएमएल ने प्रयोगशाला स्तर की प्रौद्यौगिकी को औद्योगिक स्तर तक विकसित करने और आगे सीएसआईआर की महत्वपूर्ण उपलब्धियां बढ़ाने के लिए मिलकर काम करने पर सहमति व्यक्त की है. सेल के साथ समझौता विकासशील प्रौद्यौगिकी पर केंद्रित था, जो इस्पात संयंत्रों से कार्बन फुटप्रिंट और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करता है. ये सहयोग यह भी सुनिश्चित करेंगे कि स्थायी टेक्नोलॉजी पर भी अनुसंधान को दिशा दी जा सके. अकादमिक और औद्योगिक भागीदारों के साथ सीएसआईआर- एनएमएल का सफल सहयोग समय की मांग है जो राष्ट्र के विकास में एक प्रमुख भूमिका निभाएगा.

सीएसआईआर की महत्वपूर्ण उपलब्धियां

आई.आई.पी मोहकमपुर में भारतीय पेट्रोलियम संस्थान के 63वें स्थापना दिवस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

देहरादून, 14 अप्रैल (हि.स.)। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में जीवाश्म ईंधन से नवीकरणीय ईंधन की ओर बढ़ने की यात्रा में भारतीय पेट्रोलियम संस्थान का अहम योगदान रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदूषण की रोकथाम और प्रबंधन क्षेत्रों में भी संस्थान के वैज्ञानिक तेजी से कार्य करेंगे।

गुरुवार को आईआईपी मोहकमपुर में भारतीय पेट्रोलियम संस्थान के 63वें स्थापना दिवस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रतिभाग करते हुए यह बातें कहीं। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुखद संयोग है कि आज बैसाखी, भगवान महावीर जयंती, डा.भीमराव अम्बेडकर जयंती और सीएसआईआर-भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (आईआईपी) स्थापना दिवस है। इस सीएसआईआर की महत्वपूर्ण उपलब्धियां दौरान उन्होंने सर्वप्रथम भारत रत्न बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री ने आईआईपी द्वारा किये जा रहे विभिन्न कार्यों की प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।

शोध के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां

मुख्यमंत्री ने कहा कि आईआईपी के वैज्ञानिकों ने शोध के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। जिसमें प्लास्टिक से डीजल बनाने और जहाजों के लिए बायोफ्यूल बनाने जैसी महत्वपूर्ण उपलब्धियां शामिल हैं।

आईआईपी वैश्विक महामारी के दौरान भगीरथ प्रयास और सेवा से जन-जन के लिए उपयोगी कार्यों सहित अभिनव अनुसंधान और प्रौद्योगिकी के लाभ का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। संस्थान ने पूरे भारतवर्ष में 108 ऑक्सीजन संयंत्र स्थापित किए हैं, जिसमें उत्तराखंड वासियों की सेवा में अल्मोड़ा, चमोली, देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल,रुद्रप्रयाग, टिहरी गढ़वाल और ऊधमसिंह नगर सहित 08 संयंत्र स्थापित किए गए हैं। जिससे इन जनपदों के 100 से अधिक चिकित्सालय लाभान्वित हुए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के तीव्र विकास के लिए संस्थानों एवं विभागों की भूमिका भी अहम हो जाती है। आईआईपी राज्य के 10 सीमान्त विकासखण्डों को एडाप्ट कर उनके विकास में योगदान के बारे में सोचने को कहा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आईआईपी देहरादून देश का एक मात्र बायोजेट ईंधन निर्माता है। वर्ष 2018 में देहरादून से दिल्ली तक की भारत की पहली बायोजेट ईंधन प्रचालित उड़ान में इसी बायोजेट ईंधन का प्रयोग किया गया था। पांच केन्दीय मंत्रियों की ओर से इस बायोजेट ईंधन उड़ान के दिल्ली आगमन पर स्वागत किया गया। उत्तराखंड के युवाओं की कौशल वृद्धि एवं आजीविका के बेहतर अवसर के लिए संस्थान की ओर से अनेक कार्य किये जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि आईआईपी के वैज्ञानिक वानाग्नि, फलों-सब्जियों के भंडारण एवं परिवहन और वाहनों एवं डीजल जेनसेट से होने वाले प्रदूषण की रोकथाम एवं प्रबंधन क्षेत्रों में भी तेजी से कार्य करेंगे।

इस मौके पर निदेशक,सीएसआईआर-आईआईपी डा.अंजन रे,निदेशक आर एंड डीआईओसीएल डा.एसएसवी रामकुमार, पूर्णिमा अरोड़ा,दुर्गेश पंत,सोमेश्वर पांडेय एवं संस्थान के वैज्ञानिक, अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

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