डिमोनेटाइजेशन के प्रयोग के चलते डिजिटल पेमेंट को प्राथमिकता मिलने से क्रिप्टो इनवेस्टमेंट को अनचाहा प्रोत्साहन मिला और टेक सेवी कस्टमर्स इन वर्चुअल असेट्स की ओर आकर्षित हुए। भारतीय बैंकों ने क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंजेस पर ट्रांजैक्शन को अनुमति देना चाही रखा, जिसके चलते आरबीआई को 2017 में एक अन्य सर्कुलर जारी करके वर्चुअल कॉइंस को लेकर अपनी आशंकाएं सामने रखनी पड़ीं। आखिर में, 2017 के अंत में आरबीआई और वित्त मंत्रालय द्वारा एक चेतावनी जारी करके कहना पड़ा कि वर्चुअल करंसी लीगल टेंडर नहीं हैं।

भारत में क्रिप्टोकरेंसी का सफर

भारत में क्रिप्टोकरेंसी का सफर रोलर-कोस्टर राइड से कम नहीं रहा है। पाबंदियों का सामना करने के बाद अब सख्त रेगुलेशंस की आशंकाओं के बीच, इस वर्चुअल एसेट को कई गंभीर चुनौतियों से जूझना पड़ा है। भारत में क्रिप्टोकरेंसीज के फ्यूचर को लेकर अनिश्चितता के बावजूद, अनरेगुलेटेड डिजिटल एसेट्स खासकर बिटकॉइन में निवेश का ट्रेंड 2020 के बाद काफी बढ़ा है। कई घरेलू क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंजेस से मिले डाटा से पता चलता है कि 1.5-2 करोड़ भारतीयों ने इस वर्चुअल एसेट में निवेश किया है। इससे इस साल नवंबर में यह 10 अरब डॉलर के लेवल पर जा चुका है। क्रिप्टोकरेंसी अपनाने वालों की बढ़ती संख्या से देश में निवेश का तरीका बदल गया है, जो अभी तक गोल्ड और अन्य सुरक्षित एसेट्स में निवेश करते रहे हैं। बहुप्रतीक्षित क्रिप्टोकरेंसी एंड रेगुलेशन ऑफ ऑफीशियल डिजिटल करेंसी बिल क्रिप्‍टोकरेंसी के फायदे आने से पहले, वर्चुअल एसेट्स के अभी तक के सफर पर नजर डालते हैं।

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2010: क्रिप्टो क्रिप्‍टोकरेंसी के फायदे की पहली बिक्री

दो साल बाद, बिटकॉइन के इस्तेमाल से पहली बार कोई सामान बिका जब एक शख्स ने दो पिज्जा के बदलने में 10,000 बिटकॉइन का भुगतान किया। इस तरह, पहली बार क्रिप्टोकरेंसी के साथ कैश वैल्यू जुड़ गई। कुछ समय बाद ही लाइटकॉइन, नेमकॉइन और स्विफ्टकॉइन जैसे क्रिप्टोकरेंसी सामने आईं और डिजिटल असेट को लेकर आकर्षण बढ़ने लगा।

2013: RBI ने जारी किया क्रिप्टोकरेंसी से संबंधित पहला सर्कुलर

भारत में क्रिप्टो इनवेस्टमेंट बढ़ने और जेबपे, पॉकेट बिट्स, कॉइनसिक्योर, कॉइनेक्स और यूनोकॉइन जैसे एक्सचेंजेस के सामने आने से, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने 2013 में एक सर्कुलर जारी करके यूजर्स को वर्चुअल करंसी से जुड़े संभावित जोखिमों को लेकर आगाह किया।

क्रिप्टो करेंसी के फायदे , क्रिप्टो करेंसी के नुकसान ओर क्रिप्टो का भविष्य क्या है बताइए

आप इस पोस्ट में जानेंगे क्रिप्टो करेंसी के फायदे ,क्रिप्टो करेंसी के नुकसान । कई लोग का यह भी प्रश्न रहता है कि कृपया करेंसी का भविष्य क्या है। आपको बता दूं मैं, क्रिप्टो करेंसी आने वाले समय का सबसे बड़ा जायदाद होगा। लोग आज क्रिप्टोकरंसी को छोटी नजर से देख रहे हैं लेकिन आने वाले समय में भविष्य की बात करें तो क्रिप्टो से बड़ा बाजार दूसरा कुछ नहीं हो सकता।

वैसे तो भारत ने भी यह स्वीकार किया है कि क्रिप्टो करेंसी आने वाला भविष्य है तभी भारत ने भी क्रिप्टो करेंसी को बैन नहीं किया और क्रिप्टो करेंसी को चालू रखा क्रिप्‍टोकरेंसी के फायदे और उसके ऊपर बड़ी रकम की टैक्स वसूली कर रहा है..

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क्रिप्टो करेंसी के फायदे

● ये एक ऑनलाइन Currency होने के कारण है, धोखाधड़ी और इसकी नकली करेंसी बनने के चांस कम है।
● क्रि प्टो करेंसी एक स्ट्रांग एंड अन्य सामान्य digital payment से ज्यादा सुरक्षि त माना जाता है।
● क्रि प्टो करेंसी की कीमत बहुत तेजी से दि न ब दि न बढ़ रही है, इसलि ए क्रिप्‍टोकरेंसी के फायदे इन्वेस्ट करने के लि ए यह एक अच्छा विकल्प हो सकता है। जो फ्यूचर में काफी फायदेमंद साबि त हो सकता है।
● Cryptocurrency की ट्रांसफर और लेन देन बहुत सुरक्षि त है, यह सामान्य लेन देन से बिल्कुल भिन्नऔर ज्यादा सुरक्षित है।
● कोई मेडि एटर नहीं होता है।
● यह ग्लोबल में नहीं है।
● ट्रांजैक्शन फीस बहुत ही है और ट्रांजैक्शन जल्दी और आसानी से होता है। क्रिप्टो करेंसी का गेर-लाभ
● इसमें रि वर्स ट्रांजैक्शन का ऑप्शन नहीं होने के, अगर गलती ट्रांजैक्शन हो जाता है तो आप को बहुत

Cryptocurrency: क्रिप्टोकरेंसी में निवेश से होने वाले फायदे नुकसान पर टैक्स के प्रावधान पर फैले भ्रम को सरकार किया खत्म, जानें क्या बोले वित्त राज्यमंत्री

By: ABP Live | Updated at : 21 Mar 2022 05:45 PM (IST)

Edited By: manishkumar

Cryptocurrency: क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने नाले निवेशकों के बुरी खबर है. क्रिप्टोकरेंसी निवेशकों को एक क्रिप्टोकरेंसी से हुए लाभ को दूसरे क्रिप्टोकरेंसी में हुए नुकसान की भरपाई करने की इजाजत नहीं दी जाएगी. सरकार ने ये बातें लोकसभा में कही है. सरकार के क्रिप्‍टोकरेंसी के फायदे इस जवाब से क्रिप्टोकरेंसी में निवेश के बाद टैक्स लगाने की नियम को स्पष्ट करता है. पहले निवेशकों के बीच भ्रम था कि लाभ और हानि की गणना कैसे की जाएगी.

उदाहरण के जरिए आपको समझाते हैं मान लिजिए किसी निवेशक ने बिट्कॉइन और एथेरियम दोनों क्रिप्टोकरेंसी में निवेश किया है. और उसे बिट्कॉइन में निवेश से 1 लाख रुपये का फायदा होता है और एथेरियम में निवेश से 1 लाख का नुकसान होता है तो भी निवेशक को 1 लाख रुपये पर 30 फीसदी के दर से टैक्स का भुगतान करना होगा. दरअसल प्रॉपर्टी, शेयरों में निवेश से होने वाले प्रॉफिट लॉस को एडस्ट करने का प्रावधान है. लेकिन क्रिप्टोकरेंसी को इस प्रावधान से अलग रखा गया है.

Cryptocurrency vs Digital Currency: RBI ने लांच की क्रिप्‍टोकरेंसी के फायदे क्रिप्‍टोकरेंसी के फायदे डिजिटल करेंसी, जानें क्रिप्टोकरेंसी से कैसे है अलग और क्या हैं इसके फायदे

Cryptocurrency vs Digital Currency

Cryptocurrency vs Digital Currency: क्रिप्टोकरेंसी और केंद्रीय बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) दोनों ने पूरे भारत में लाखों लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। डिजिटल एसेट्स के रूप में सामान्य स्थिति के बावजूद दोनों में काफी अंतर है। पूर्व वित्त सचिव एससी गर्ग का क्रिप्‍टोकरेंसी के फायदे मानना है कि सीबीडीसी डीमैटरियलाइज्ड बैंक नोट की तरह होता है, और उसका क्रिप्टोकरेंसी से कोई लेना-देना नहीं है।

बता दें कि देश में पहले ही बहुत से ऑनलाइन पेमेंट के ऑप्शन मौजूद है।ऐसे में अहम सवाल यह है कि जब इतने सारे ऑनलाइन पेमेंट के विकल्प मौजूद हैं और वो बेहतर काम भी कर रहे हैं तो फिर डिजिटल रुपया लाने की जरूरत ही क्यों पड़ी। क्यों खास है डिजिटल करेंसी (Digital Currency) और यह Cryptocurrency से कितनी अलग है।

सीबीडीसी डिजिटल कॉइन क्रिप्टो का भविष्य

क्रिप्टोकरेंसी को दुनिया मुद्रा के रूप में स्वीकार नहीं कर सकती है। हालांकि, सीबीडीसी जैसे रेगुलेटेड डिजिटल कॉइन क्रिप्टो का भविष्य हो सकते हैं। मैकिन्से ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में स्टेबल कॉइन के प्रचलन में तेजी से वृद्धि के साथ केंद्रीय बैंकों ने अपनी स्टेबल डिजिटल करेंसी का पता लगाने के प्रयास तेज कर दिए हैं।

Cryptocurrency vs Digital Currency

आरबीआई द्वारा जारी किया गया डिजिटल टोकन

सीबीडीसी या भारतीय ई-रुपया आरबीआई द्वारा जारी किया गया एक डिजिटल टोकन है और यह देश की फिएट करेंसी से जुड़ा हुआ है। ब्लॉकचैन विशेषज्ञों के एक समूह ब्लॉकचैन काउंसिल का कहना है कि क्रिप्टोकरेंसी और ब्लॉकचैन टेक्नोलॉजी के विकास ने कैशलेस सोसाइटी और डिजिटल करेंसी में रुचि बढ़ा दी है, जिसके चलते दुनिया भर की सरकारें और केंद्रीय बैंक सरकार समर्थित डिजिटल करेंसी के उपयोग पर विचार कर रहे हैं।

सीबीडीसी का प्राथमिक उद्देश्य कंपनियों और उपभोक्ताओं को गोपनीयता, हस्तांतरणीयता, सुगमता और वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है। काउंसिल का कहना है, सीबीडीसी एक जटिल वित्तीय प्रणाली के लिए आवश्यक रखरखाव को भी कम करता है, सीमा पार लेनदेन लागत में कटौती करता है और उन लोगों को कम लागत वाले विकल्प देता है जो अब दूसरे धन हस्तांतरण विधियों का उपयोग करते हैं।

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Digital currency vs cryptocurrency: क्रिप्टो करेंसी और भारत सरकार की डिजिटल करेंसी में क्या है अंतर

नई दिल्ली: Digital currency vs cryptocurrency-डिजिटल रुपया या सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए RBI का अगला प्रयास होगा. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा केंद्रीय बजट 2022-23 में डिजिटल रुपये को लेकर कई घोषणाएं की गई हैं. लेकिन कई लोग कंफ्यूज हैं कि अभी डिजिटल करेंसी को सरकार हां क्रिप्‍टोकरेंसी के फायदे कर रही है लेकिन बिटक्वाइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी को ना क्यों कह रही है. इस अंतर को समझ कर ही हम डिजिटल करेंसी के फायदे और नुकसान को समझ सकेंगे.

विशेषज्ञों के मुताबिक डिजिटल रुपये की अवधारणा बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी से प्रेरित है, लेकिन केंद्रीय बैंक के नियमों के साथ. यानी बिटक्वाइन अनियंत्रित होती है जबकि डिजिटल करेंसी केंद्रीय बैंक की ओर से जारी की जाती है. क्रिप्टोकरेंसी का प्रबंधन एक कंप्यूटर एल्गोरिथम द्वारा किया जाता है. वहीं डिजिटल करेंसी को अथारिटी द्वारा नियंत्रित किया जाता है. डिजिटल रुपये को सरकार की मान्यता मिली होती है. डिजिटल रुपये केंद्रीय बैंक की बैलेंसशीट में भी शामिल होगी और इसे देश की सॉवरेन करेंसी में बदला जा सकता है. प्रस्ताव है कि देश में डिजिटल करेंसी को बैंक नोट की परिभाषा में रखा जाए. इसके लिए RBI ने कानून में संशोधन का प्रस्ताव दिया है.

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