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लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन में से छूट व कर की गणना

[15/01, 20:31] CA Raghuveer Punia, Jaipur: . प्रॉपर्टी बेचते- खरीदते समय अन्य ध्यान रखने योग्य बातें.

1- प्रॉपर्टी की खरीद व बिक्री डीएलसी से कम पर न करें। अगर डीएलसी से कम पर की है तो विक्रेता के धारा 50C में डिफरेन्स पर टैक्स लगेगा तथा क्रेता के धारा 56 में डिफरेंस पर टैक्स लगेगा।

2- नकद में प्रॉपर्टी न बेचें। अगर प्रॉपर्टी बेचने वाले ने 20,000/- ( रुपये बीस हजार या उससे ज्यादा) नकद ले लिए हैं तो धारा 269SS में बराबर की पेनल्टी है।

3- अगर 50 लाख से बड़ी प्रॉपर्टी खरीद रहे हैं तो 1% टीडीएस धारा 194IA के अनुसार काटकर ऑनलाइन तुरन्त जमा कराएं।

Since 1995, He is handling all aspects of trust- income-tax registration u/s 12A, 80G, 10 (23C), compliance work, FCRA, foreign grants, NITI Ayog registration, Auditing, due diligence of channel partners, GST on NGOs, Income Tax scrutiny related to NGO/NPO and Social Service Organisation (Society/Trust/section 8/25 of companies act). This is शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन the core area of practice and he has been handling the most complex cases pertaining to the above aspects. He is handling litigation /cases/matters related to income tax, before the Assessing Officer, CIT Appeals, ITAT across India. He is handling litigation /cases/matters related to GST, before adjudicating authority, Commissioner (Appeals) across India. He provides consultancy and opinions on income tax and GST matters for corporates and B2B. He is a regular panelist on TV debates as an expert in the matters of economy, taxation, Income Tax, GST, etc. He is a regular blogger and avid contributor on Income Tax, GST, and current economic issues. He also, handle issues related to ED investigation under PMLA. He also handles matters before NCLT regarding IBC and Company Law. He is a regular speaker in seminars/webinars. He has developed a new passion to be a YouTuber on the core matters mentioned above.

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क्या है कैपिटल गेंस बॉन्ड, क्या आपको इसमें निवेश करना चाहिए?

कैपिटल गेंस बॉन्ड्स में निवेश की न्यूनतम रकम 20,000 रुपये है। एक फाइनेंशियल ईयर में मैक्सिमम लिमिट 50 लाख रुपये है। अगर आपकी प्रॉपर्टी ज्वाइंट नाम से है तो हर ओनर के लिए 50-50 लाख रुपये की अलग-अलग लिमिट होगी

कैपिटल गेंस बॉन्ड को सरकार का सपोर्ट हासिल होता है। इसलिए रेटिंग एजेंसियां इससे सबसे ज्यादा रेटिंग देती हैं। इसलिए इसे सबसे सुरक्षित इनवेस्टमेंट माना जाता है।

अगर खरीदने के दो साल के अंदर आप रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी (जमीन, घर या अपार्टमेंट) बेच देते हैं तो उससे हुए प्रॉफिट को शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) कहा जाता है। दो साल के बाद बेचने पर हुए प्रॉफिट को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) कहा जाता है। STCG पर आपके इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। LTCG पर इंडेक्सेशन (Indexation) के साथ 20.6 फीसदी के रेट से टैक्स लगता है।

अगर आपको अपना पुराना घर बेचने पर 50 लाख रुपये LTCG होता है तो आपका टैक्स 10.3 लाख रुपये होगा। अगर आप यह टैक्स (10.3 लाख रुपये) बचाना चाहते हैं तो आपके पास दो ऑप्शंस हैं।

पहला ऑप्शन टैक्स सेविंग्स बॉन्ड (Capital Gains Bonds) का है। आपको 50 लाख रुपये का पूरा LTCG टैक्स सेविंग्स बॉन्ड में इनवेस्ट करना होगा। दूसरा ऑप्शन यह है कि इस पूरे पैसे का इस्तेमाल आपको दूसरी रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी खरीदने के लिए करना होगा।

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आइए अब पहले ऑप्शन के बारे में जानते हैं। कैपिटल गेंस बॉन्ड्स में निवेश की न्यूनतम रकम 20,000 रुपये है। एक फाइनेंशियल ईयर में मैक्सिमम लिमिट 50 लाख रुपये है। अगर आपकी प्रॉपर्टी ज्वाइंट नाम से है तो हर ओनर के लिए 50-50 लाख रुपये की अलग-अलग लिमिट होगी।

कैपिटल गेंस बॉन्ड को सरकार का सपोर्ट हासिल होता है। इसलिए रेटिंग एजेंसियां इसे सबसे ज्यादा रेटिंग देती हैं। इसलिए इसे सबसे सुरक्षित इनवेस्टमेंट माना जाता है। लेकिन, इसमें पांच साल का लॉक-इन पीरियड होता है। इस पर आपको सिर्फ सालाना 5 फीसदी इंटरेस्ट मिलता है। इनवेस्टर को इस पर टैक्स भी देना पड़ता है।

दूसरा ऑप्शन यह है कि LTCG का इस्तेमाल रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी (मैक्सिमम दो) खरीदने के लिए किया जाए। यह काम आपको तय समयसीमा के अंदर करना होगा। यह याद रखें कि LTCG का इस्तेमाल दो प्रॉपर्टी खरीदने के लिए तभी किया जा सकता है जब LTCG का अमाउंट 2 करोड़ रुपये से ज्यादा न हो। यह भी ध्यान में रखें कि अगर आपने एक बार इस ऑप्शन का इस्तेमाल कर लिया तो भविष्य में आप फिर कभी दोबारा इस ऑप्शन का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे।

कैपिटल गेन बॉन्ड्स (54EC) का रिटर्न बहुत कम है। इसकी ट्रांजेक्शन कॉस्ट ज्यादा है। उधर, रियल एस्टेट में रिइनवेस्ट करने में काफी रिस्क है। इसलिए कई फाइनेंशियल प्लानर्स LTCG पर टैक्स चुकाने और फंड को सही जगह इनवेस्ट करने की सलाह देते हैं।

लैडर7 वेल्थ प्लानर्स के फाउंडर और प्रिंसिपल ऑफिसर सुरेश सदगोपन ने कहा, "टैक्स चुकाकर सही जगह इनवेस्ट करना और ज्यादा रिटर्न हासिल करना बेहतर ऑप्शन है। कैपिटल गेन बॉन्ड्स में इनवेस्ट करने पर आपका पैसा पांच साल के लिए लॉक हो जाता है। "

उन्होंने कहा कि आप इक्विटी आधारित प्रोडक्ट्स पर विचार कर सकते हैं। लंबी अवधि के निवेश के लिए यह अच्छा है। उन्होंने कहा, "आप सीधे शेयरों, म्यूचुअल फंड्स, पीएमएस आदि में इनवेस्ट कर सकते हैं। इनमें लंबे समय तक इनवेस्ट कर 10 फीसदी से ज्यादा रिटर्न कमाया जा सकता है।"

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First Published: Jun 15, 2022 12:41 PM

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Income Tax Saving: अगर आपको हुआ है नुकसान, तो घटा सकते हैं टैक्स देनदारी, जानिए- क्या है तरीका?

Income Tax Saving: अगर आपको बिजनेस में नुकसान उठाना पड़ा है, तो अपनी टैक्स देनदारी को कम कर सकते हैं. सरकार आयकरदाताओं को कई तरह की सुविधाएं देती है. जिसमें वे अपने फायदे को किसी नुकसान के साथ एडजस्ट कर सकते हैं.

Published: July 8, 2022 11:22 AM IST

(Symbolic Image)

Income Tax Saving: देश का टैक्स कानून इनकम टैक्स देने वालों को ऐसी सुविधाएं देता है, जिससे आप अपनी टैक्स देनदारी कम कर सकते हैं. इन्हीं में से एक है कारोबार या निवेश में नुकसान होने पर उसके बारे में जानकारी देकर टैक्स देनदारी कम करना. आयकर अधिनियम के तहत करदाताओं द्वारा अर्जित आय को पांच प्रमुख श्रेणियों में रखा गया शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन है. जिसमें वेतन, गृह संपत्ति, पूंजीगत लाभ, व्यवसाय या पेशेवर और अन्य स्रोत प्रमुख हैं.

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यह समझने के लिए कि किस तरह से नुकसान को समायोजित करके अपनी कर देयता को कैसे कम किया जाए, यहां पर नुकसान समायोजन के दो तरीकों से समझते हैं. एक इंट्रा हेड और दूसरा इंटर हेड. करदाताओं को एक ही शीर्ष के भीतर आय के एक स्रोत से आय के अन्य स्रोतों से होने वाली हानि के लिए समायोजित किया जा सकता है. उदाहरण के लिए, आप व्यवसाय X से होने वाले नुकसान को व्यवसाय Y के लाभ के साथ समायोजित कर सकते हैं.

नुकसान को कैसे समायोजित किया जाता है

दूसरी ओर, अंतर शीर्ष समायोजन में, करदाता आय स्रोत के एक शीर्ष से होने वाले नुकसान को दूसरे शीर्ष के भीतर आय के साथ समायोजित कर सकता है. उदाहरण के लिए, मान लीजिए कि आप वेतन आय के साथ गृह संपत्ति के शीर्ष को समायोजित कर सकते हैं. टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि टैक्सपेयर्स को इंटरहेड एडजस्टमेंट से पहले इंट्राहेड एडजस्टमेंट करना चाहिए.

कैपिटल लॉस

कैपिटल लॉस को किसी अन्य शीर्ष के अंतर्गत आने वाली आय के विरुद्ध समायोजित नहीं किया जा सकता है. मतलब आप कैपिटल लॉस को सिर्फ कैपिटल गेन से एडजस्ट कर सकते हैं. साथ ही, आप लॉन्ग टर्म कैपिटल लॉस को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन के साथ एडजस्ट कर सकते हैं. वहीं, आप लॉन्ग टर्म और शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन दोनों के साथ शॉर्ट टर्म कैपिटल लॉस को एडजस्ट कर सकते हैं.

हाउस असेट

गृह संपत्ति के कारण हानि का नियम समायोजन की दृष्टि से अधिक उदार है. इसे किसी अन्य मद से आय के विरुद्ध समायोजित किया जा सकता है, लेकिन किसी विशेष वर्ष में केवल 2 लाख रुपये की सीमा तक. अगर समय सीमा तक आयकर रिटर्न दाखिल नहीं किया जाता है, तो भी करदाता इसे अगले आठ वर्षों के लिए समायोजित कर सकता है. हालांकि, बाद के वर्षों में, इसे केवल गृह संपत्ति से होने वाली आय से ही समायोजित किया जा सकता है. ये नियम कमर्शियल प्रॉपर्टी पर भी लागू होंगे.

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शेयर बाजार से हुई कमाई पर कितना लगता है इनकम टैक्स, स्टॉक्स में पैसे लगाने से पहले ये जानना है जरूरी

शेयर बाजार से हुई कमाई पर कितना लगता है इनकम टैक्स, स्टॉक्स में पैसे लगाने से पहले ये जानना है जरूरी

अगर आप भी शेयर बाजार में पैसे लगाते हैं तो आपको इसका टैक्स सिस्टम पता होना चाहिए. शेयर बाजार में लोग कई तरह से कमाई करते हैं और अलग-अलग तरीकों से हुई कमाई पर टैक्स भी अलग-अलग तरीके से लगता है.

कोरोना काल में पहले तो शेयर बाजार (Share शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन Market) बुरी तरह टूटा, लेकिन फिर उसमें तगड़ी तेजी भी देखने को मिली. इस तेजी की एक वजह यह भी रही कि पहले की तुलना में अधिक लोगों ने शेयर बाजार में पैसा लगाना शुरू कर दिया. कुछ साल पहले की तुलना में अब बहुत सारे लोग शेयर मार्केट में पैसे लगाते हैं. बीएसई से पहले 5 करोड़ इन्वेस्टर करीब 12 सालों में जुड़े, जबकि महज दो सालों में ही 5 करोड़ और इन्वेस्टर जुड़ गए. यानी अब शेयर बाजार में पैसे लगाने वाले बहुत अधिक बढ़ चुके हैं. ऐसे में ये जानना भी बहुत जरूरी है कि शेयर बाजार से जो कमाई होती है, उस पर कितना इनकम टैक्स (Taxation on Share Market Earning) लगता है.

सबसे पहले बात इंट्रा-डे की

कोरोना काल में ऐसे बहुत सारे लोग शेयर बाजार से जुड़े, जिनका मकसद निवेश करना नहीं, बल्कि ट्रेडिंग करना था. बता दें जब लोग शेयर बाजार में कम समय के लिए पैसे लगाते हैं और मुनाफा मिलते ही उन्हें बेच देते हैं, उसे ट्रेडिंग कहते हैं. यह ट्रेडिंग एक दिन से लेकर कुछ दिनों, हफ्तों या महीनों तक के लिए भी की जाती है. अगर कोई शख्स एक ही दिन में शेयर को खरीदकर उसे बेच भी देता है, तो इसे इंट्रा-डे ट्रेडिंग कहते हैं. अगर आप इंट्रा-डे ट्रेडिंग करते हैं तो आपको अपने टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स देना होगा. यानी अगर आपकी कुल कमाई 2.5 लाख रुपये से भी कम है तो आप पर कोई टैक्स नहीं लगेगा, जबकि इससे ऊपर की कमाई पर आपको स्लैब के हिसाब से टैक्स चुकाना पड़ेगा.

फ्यूचर-ऑप्शन ट्रेडिंग पर कैसे लगता है टैक्स

अगर आप फ्यूचर या ऑप्शन ट्रेडिंग करते हैं तो भी आप पर इंट्रा डे की तरह ही टैक्स लगेगा. यानी फ्यूचर या ऑप्शन ट्रेडिंग से आपको जो मुनाफा होगा, उस पर आपको खुद पर लगने वाले टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स चुकाना होगा. बता दें कि फ्यूचर-ऑप्शन ट्रेडिंग के तहत आप बाद की यानी आने वाले दिनों की किसी तारीख के लिए डील फाइनल करते हैं. फ्यूचर के तहत अगर आप कोई स्टॉक लेते हैं तो आपको उस डील में फायदा हो या नुकसान, आप समय से पहले उससे बाहर नहीं निकल सकते. वहीं ऑप्शन ट्रेडिंग में आपको अगर नुकसान होने लगता है तो आप डील छोड़ सकते हैं. इनका इस्तेमाल सबसे ज्यादा हेजिंग के लिए होता है, लेकिन बहुत से ट्रेडर इसे मुनाफा कमाने के लिए भी इस्तेमाल करते हैं.

शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन पर कैसे लगता है टैक्स?

अगर आप किसी शेयर को अपने पोर्टफोलियो में कम से कम 1 दिन या अधिक से अधिक 364 दिन मतलिब 1 साल से कम तक रखते हैं तो उसे शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स कहा जाता है. इस पर आपको फ्लैट 15 फीसदी का टैक्स देना होता है. हालांकि, अगर आपकी कमाई 2.5 लाख रुपये से कम है तो आपको कोई टैक्स नहीं देना होगा, लेकिन कमाई उससे ऊपर बढ़ते ही फ्लैट 15 फीसदी टैक्स लगेगा, भले ही आप किसी भी स्लैब के दायरे में आते हों.

लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन हुआ तो कैसे लगेगा टैक्स?

ऐसे भी बहुत सारे लोग हैं जो शेयर बाजार में 1 साल से अधिक की अवधि के लिए शेयर खरीदते हैं. इसे ही निवेश कहा जाता है. बड़े-बड़े दिग्गज निवेशक हर किसी को निवेश की सलाह ही देते हैं. अगर आपको कैपिटल गेन होता है तो उस पर आपको 1 लाख रुपये तक पर कोई टैक्स नहीं चुकाना होगा. वहीं अगर आपकी कमाई इससे अधिक होती है तो उस पर फ्लैट 10 फीसदी टैक्स चुकाना होगा. इसमें भी इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप किस टैक्स स्लैब में आते हैं. हालांकि, अगर आपकी कमाई 2.5 रुपये तक ही है तो आपको कोई टैक्स नहीं देना होगा.

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