Edited By: Sachin Chaturvedi @sachinbakul
Published on: October 21, 2022 16:54 IST

बीएसई बढ़ाएगा वायदा कारोबार

आखिरकार बंबई स्टॉक एक्सचेंज काफी दिन से ठंडे बस्ते में पड़े डेरिवेटिव कारोबार में जान फूंकने की कोशिश में जुट गया है।
अपने प्रयासों के तहत बीएसई सेंसेक्स में फ्यूचर्स (वायदा) में कारोबार और बीएसई ऑनलाइन ट्रेडिंग टर्मिनल (बीओएलटी) में शेयरों के कारोबार शुरू करने की छूट दे रही है।
इस समय बीओएलटी टर्मिनल का इस्तेमाल एक्सचेंज में नकदी के कारोबार के लिए हो रहा है। बीएसई ने जो प्रयास शुरू किया है उसका मकसद डेरिवेटिव कारोबार की प्रक्रिया को नकदी और फ्यूचर्स कारोबार की तरह ही सरल बनाना है। इसके साथ ही वायदा कारोबार को सरल और सस्ता बनाने की कोशिश की जा रही है।
एशिया के इस पुराने स्टॉक एक्सचेंज में डेरिवेटिव कारोबार बहुत पहले शुरू करने की बात चल रही थी क्योंकि डेरिवेटिव कारोबार शुरू करने में नैशनल स्टॉक एक्सचेंज पहले ही बीएसई को पछाड़ चुका है और इस कारोबार में इसकी हिस्सेदारी 1 फीसदी से भी कम रह गई है।
इस समय बीएसई में डेरिवेटिव कारोबार पूर्ण रूप से स्वचालित स्क्रीन आधारित प्लेटफॉर्म शेयर बाजार के लिए ट्रेडिंग टर्मिनल क्या है डीटीएसएस (डेरिवेटिव ट्रेडिंग सेटलमेंट सिस्टम) के जरिये होता है जिसे वास्तविक समय पर कारोबार के लिए तैयार किया गया है।
बीएसई में 280 सदस्य डेरिवेटिव कारोबार के लिए सूचीबध्द हैं लेनिक उनकी समस्या यह है कि उनमें से अधिकांश के पास डीटीएसएस की सुविधाएं सभी शाखाओं पर उपलब्ध नहीं है। शायद यही एक वजह है जिससे बीएसई में डेरिवेटिव कारोबार सुसुप्प्तावस्था में पडा है।
बीएसई के इस कारोबार को शुरू नहीं कर पाने से एनएसई ने डेरिवेटिव कारोबार शुरू कर इसे पछाड दिया। बीएसई के नजदीकी सूत्रों का कहना है कि इस साल मई के शुरुआत में बीओएलटी में डेरिवेटिव कारोबार शुरुआती कदम होगा और उसके बाद इस कारोबार में तेजी लाने के लिए और भी उपाय किए जाएंगे।
शुरू में इंडेक्स में वायदा और शेयरों को कारोबार की छूट होगी क्यांकि एक्सचेंज को तकनीकी मोर्चे पर कई बदलाव की प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा। ऑप्शन कारोबार को दूसरे चरण में शुरू किया जा सकता है।
इसके अलावा बीएसई कई और फयुचर्स की शुरुआत करने की योजना बना रही है जो बीओएलई टर्मिनल में डीटीएसएस में बाद में उपलब्ध हैं। ऐसे ब्रोकर जो बीओएलटी में डेरिवेटिव का कारोबार करना चाहते हैं, उनको कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना पड़ेगा । लेकिन उनके लिए डेरिवेटिव सदस्यता के लिए आवश्यक शर्तों की पूर्ति करना अनिवार्य होगा।
हम भी क्यों रहें पीछे …
एनएसई से पिछड़ने के बाद बीएसई काफी लंबे समय से डेरिवेटिव कारोबार को शुरू करने की योजना बना रहा था
400 शहरों में 40,000 बीओएलटी है जिनमें कुल 700 सदस्य हैं
फिलहाल बीएसई में डेरिवेटिव कारोबार डीटीएसएस से हो रहा है

बिड-आस्क स्प्रेड

यह किसी कमोडिटी के किसी फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट के बाय/बिड प्राइस (खरीदार जिस कीमत को चुकाने के लिए तैयार है) और आस्क/सेल (बिकवाल जिस कीमत पर बेचने के लिए तैयार है) के बीच का अंतर है। कोई ट्रेड खरीदार के लिए आस्क प्राइस और बिकवाल के लिए बिड प्राइस पर होता है, जिसे ट्रेडिंग टर्मिनल में लॉग-इन किया जाता है। बिड-आस्क स्प्रेड किसी कमोडिटी में आपूर्ति-मांग की स्थिति बताता है। अलग-अलग कमोडिटी के स्प्रेड पर उस कमोडिटी के कॉन्ट्रैक्ट में लिक्विडिटी का असर पड़ता है। जब यह अंतर या स्प्रेड कम होता है तो इसका मतलब है कि बाजार में खरीदारी और बिकवाली की राय में समानता है। शेयर बाजार के लिए ट्रेडिंग टर्मिनल क्या है लेकिन स्प्रेड असाधारण रूप से ज्यादा होने का मतलब यह है कि बाजार में एक पक्ष का ज्यादा दबदबा है। अगर स्प्रेड पॉजिटिव है तो इसका मतलब है कि बिकवाल मजबूत स्थिति में हैं और अगर यह निगेटिव है तो इसका मतलब है कि बाजार में खरीदार अहम भूमिका निभा रहे हैं। इससे ट्रेडर्स को निवेश की रणनीति बनाने में मदद मिलती है। कमोडिटी एफएंडओ और स्पॉट डिटेल के लिए कमोडिटी के नाम पर क्लिक करें।

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what-is-rollover-or-carry-forward-in stock-market-in-hindi ?


ROLLOVER

भारत में Contracts Rolled Over कैसे काम करते हैं ?

rollover

rollover

भारत में equity derivatives के अनुबंध हर महीने अंतिम गुरुवार को तय किए जाते हैं (यदि गुरुवार को सार्वजनिक अवकाश होता है, तो निपटान गुरुवार से एक दिन पहले होता है, जो बुधवार है)।

जबकि रोलओवर उस दिन ट्रेडिंग घंटे के अंत तक पूरा हो जाता है, रोलओवर का एक हिस्सा समाप्ति तिथि से एक सप्ताह पहले शुरू होता है।

हालांकि, ट्रेडिंग टर्मिनल पर स्प्रेड विंडो के माध्यम से दूसरे महीने में पोजीशन को रोलओवर किया जाता है।

उदाहरण के लिए, यदि कोई trader nifty का एक future अनुबंध रखता है जो जल्द हीaugust में समाप्त हो रहा है, तो वह इस स्थिति को august तक carry forward के लिए उस स्प्रेड की कुंजी लगाकर प्रवेश करेगा, जिस पर वह positin को September तक रोल करना चाहता है।

पहले यह दो चरणों वाली प्रक्रिया थी, लेकिन इस spread window ने भारत के सभी traders के लिए roll over करना आसान बना दिया है।

Rollover की व्याख्या कैसे करें?

Rollover को आम तौर पर कुल position के प्रतिशत के रूप में व्यक्त किया जाता है। रोलओवर के लिए कोई विशिष्ट मानक नहीं हैं।

हालांकि, उनकी तुलना उनके ऐतिहासिक डेटा के आधार पर की जाती है, मुख्य रूप से तीन महीने के औसत पर।

मोटे तौर पर, रोलओवर बाजार पर अपने दांव को आगे बढ़ाने के लिए traders की गंभीरता का एक संकेतक है। लेकिन, आंकड़े यह नहीं बताएंगे कि traders का दांव किस दिशा में है।

कई मौकों पर, रोलओवर जो औसत से कम सिग्नल होते हैं, अनिश्चितता दिखाते हैं, जबकि उच्च रोलओवर यह दर्शाते हैं कि बाजार की तीव्र भावना है।

काल्पनिक रूप से, यदि भविष्य में निफ्टी मई श्रृंखला से जून तक शुरू होकर 70% पर है और तीन महीने का औसत 65% है, तो इसका मतलब है कि सभी traders अधिक position बनाने के इच्छुक हैं और बाजार पर अपने विचारों के बारे में आश्वस्त हैं।

हालांकि, कई बार Rollover के रुझान गलत दिशा में ले जा सकते हैं।

उदाहरण के लिए, 70% Rollover निचले आधार के open interest पर हो सकता है, जो कि outstanding positions की संख्या है।

जबकि औसतन 65% रोल्स लगभग एक उच्च आधार के खुले हित में हुआ होगा।

Rollover डेटा कैसे एक्सेस करें?

trading data के विपरीत, कई एक्सचेंज वेबसाइटों द्वारा Rollover को स्पष्ट रूप से कैप्चर नहीं किया जाता है। इसके बजाय, कई विश्लेषकों ने बड़ी मात्रा में trading data की गणना और समूहीकरण करके रोलओवर का चित्रण किया है।

क्या Rollover विकल्प में संभव है?

रोलओवर केवल भविष्य में ही संभव है, विकल्पों में नहीं। ऐसा इसलिए है क्योंकि फ्यूचर्स के लिए एक्सपायरी डेट पर सेटलमेंट करना अनिवार्य है, जबकि एक मौका है कि ऑप्शन का इस्तेमाल किया जा सकता है या नहीं भी किया जा सकता है।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि विकल्प पूरी तरह से तस्वीर से बाहर हैं। कुछ ट्रेडर एक समान एक्सपायरी के ऑप्शंस के इंप्लाइड वोलैटिलिटी (शेयर बाजार के लिए ट्रेडिंग टर्मिनल क्या है IV) में कई बदलावों की जांच करके रोलओवर के बारे में अपने स्पष्टीकरण की पुष्टि करते हैं।

साथ में उच्च निहित अस्थिरता, और एक शक्तिशाली तेजी रोलओवर एक मजबूत सकारात्मक भावना को इंगित करता है।

carry forward ट्रेडिंग क्या है?

carry forward

carry forward

कैरी फॉरवर्ड ट्रेडिंग आपको शेयरों को खरीदने और उन्हें उसी दिन बेचने में सक्षम बनाता है लेकिन यदि आप अपने स्टॉक को आगे बढ़ाना चाहते हैं तो आपके खाते में पर्याप्त मार्जिन होना चाहिए अन्यथा हमें इसे अगले दिन मौजूदा कीमत पर बेचना होगा।

STOCK TRADING SOFTWARE क्या होता है?

Zerodha

आज दिनों दिन बढती टेक्नोलॉजी के ज़माने में किसी स्टॉक को खरीदना या बेचना बहुत ही आसान काम हो चूका है, आप अपने मोबाइल और कंप्यूटर कि मदद से जब चाहे, जहा से चाहे स्टॉक को खरीदने या बेचने का आर्डर दे सकते है, और ये आर्डर जितना जल्दी पॉसिबल हो, लगभग कुछ सेकंड्स में ही पूरा हो जाता है,

और इस तरह कुछ ही सेकंड्स में स्टॉक खरीदने और बेचने का काम संभव हुआ है, इन्टरनेट के इस्तेमाल और स्टॉक ब्रोकर द्व्रारा दी जाने वाली MOBILE APPS और LAPTOP/COMPUTER पर STOCK TRADING SOFTWARE कि मदद से,

और आज स्टॉक मार्केट पूरी तरह से इन्टरनेट से जुड़ा हुआ है, और आप हर पल मार्केट में होने वाले उतार चढाव को अपने इस STOCK TRADING SOFTWARE कि मदद से मोबाइल और कंप्यूटर दोनों पर ही देख सकते है,

STOCK TRADING SOFTWARE कितने प्रकार का होता है?

स्टॉक ब्रोकर द्वारा एक USER को शेयर खरीदने और बेचने के लिए STOCK TRADING SOFTWARE तीन तरह से दिया जाता है –

  • WEB BROWSER BASED TRADING
  • सिर्फ कंप्यूटर पर Stock Trading Terminal
  • Stock trading mobile apps.

आम तौर पर आजकल सभी स्टॉक ब्रोकर स्टॉक खरीदने के लिए आपको इन्टरनेट कि मदद से स्टॉक खरीदने और बेचने की तीन सुविधा देते है, ऐसे में आपको अपने स्टॉक ब्रोकर से ये पहले ही पता कर लेना चाहिए कि वो किस तरह के TRADING PLATFORM कि सुविधा दे रहा है,

और आप अपनी सुविधानुसार TRADING PLATFORM की मांग अपने स्टॉक ब्रोकर से कर सकते है,

STOCK TRADING SOFTWARE कैसे काम करता है?

जहा तक बात है कि STOCK TRADING SOFTWARE कैसे काम करता है, तो स्टॉक ब्रोकर द्वारा दिया जाने वाला TRADING PLATFORM , चाहे वो कंप्यूटर पर हो या मोबाइल पर, ये सभी सॉफ्टवेर प्रोग्राम, आम यूजर को एक USER INTERFACE देते है, जिसमे BUY और SELL का आर्डर भेजने के लिए कुछ COMMANDS का उसे करते है,

जैसे ही USER कोई BUY या SELL का आर्डर भेजता है, स्टॉक ब्रोकर उस आर्डर को यूजर के खाते में पर्याप्त रकम का ध्यान रखते हुए, उसे आर्डर को स्टॉक एक्सचेंज NSE या BSE तक भेज देता है,

और NSE या BSE जिनका काम है, स्टॉक खरीदने और बेचने के आर्डर को पूरा करना, वो पलक झपकते हुए स्टॉक की डिमांड और सप्लाई के अनुसार आर्डर को पूरा कर देते है,

और यूजर को स्टॉक ख़रीदे या बेचे जाने का कन्फर्मेशन उसके TRADING PLATFORM और मोबाइल पर SMS भेजकर कन्फर्म कर दिया जाता है,

STOCK TRADING SOFTWARE को समझे?

जब आप पहली बार कोई स्टॉक खरीदने और बेचने जाते है, तो आपको अपने स्टॉक ब्रोकर द्वारा दी जाने वाली TRADING PLATFORM , चाहे वो कंप्यूटर पर हो या मोबाइल पर, शेयर बाजार के लिए ट्रेडिंग टर्मिनल क्या है ये सभी सॉफ्टवेर प्रोग्राम, उसे सिखने और समझने कि जरुरत होती है,

ताकि आप सही तरह से स्टॉक खरीदने और बेचने का आर्डर भेज सके, और साथ ही किसी तरह कि गलती होने पर आप अपने आर्डर में कुछ सुधार करके दुबारा से आर्डर भेज सके,

या आप आर्डर कैंसल करना चाहते है, STOP LOSS लगाना चाहते है, या कुछ FIXED PRICE पर शेयर को खरीदना चाहते है, तो ऐसे में आपको स्टॉक ब्रोकर द्वारा दी जाने वाली सॉफ्टवेयर को इस्तेमाल करने कि ट्रेनिंग ले लेनी चाहिए,

आजकल सभी स्टॉक ब्रोकर के ट्रेनिंग विडोज और इस्तेमाल करने कि विधि, TRADING PLATFORM चाहे वो कंप्यूटर पर हो या मोबाइल पर, ये सभी सॉफ्टवेर प्रोग्राम,आपको ONLINE वेबसाइट या YOU TUBE कि हेल्प से सिखने को मिल जाती है,

Stock Market Muhurat Trading: दीपावली पर Muhurat Trading की ये होगी टाइमिंग, जानिए कैसी रही थी 2021 की मुहूर्त ट्रेडिंग

किसी भी नई चीज की शुरुआत करने के लिए दीपावली को सबसे अच्छा वक्त माना जाता है। बाजार में धारणा सकारात्मक है और विभिन्न क्षेत्रों में खरीदारी हो रही है। माना जाता है कि इस सत्र के दौरान खरीदारी करने पर निवेशक को सालभर लाभ मिलता है।

Sachin Chaturvedi

Edited By: Sachin Chaturvedi @sachinbakul
Published on: October 21, 2022 16:54 IST

Muhurat Trading- India TV Hindi

Photo:FILE Muhurat Trading

शेयर बाजार में यूं तो साल भर कारोबार होता है, लेकिन दिवाली का दिन बाजार के लिए बेहद खास होता है। इस दिन शेयर बाजार में निवेश शुभ और वित्तीय समृद्धि प्रदान करने वाला माना जाता है। इस साल हिंदू संवत वर्ष 2079 की शुरुआत के पहले दिन दीपावली पर सोमवार को प्रमुख शेयर बाजार बीएसई और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में एक घंटे का विशेष कारोबारी सत्र ‘मुहूर्त ट्रेडिंग’ होगा।

क्या होगी मुहूर्त ट्रेडिंग की टाइमिंग

दोनों शेयर बाजारों ने अलग-अलग परिपत्रों में बताया कि यह सांकेतिक कारोबारी सत्र शाम को सवा छह बजे से सवा सात बजे के बीच होगा। ऐसी मान्यता है कि ‘मुहूर्त’ के दौरान सौदे करना शुभ होता है और वित्तीय समृद्धि लाता है। अपस्टॉक्स में निदेशक पुनीत माहेश्वरी ने कहा, ‘‘किसी भी नई चीज की शुरुआत करने के लिए दीपावली को सबसे अच्छा वक्त माना जाता है। बाजार में धारणा सकारात्मक है और विभिन्न क्षेत्रों में खरीदारी हो रही है। माना जाता है कि इस सत्र के दौरान खरीदारी करने पर निवेशक को सालभर लाभ मिलता है।’’

सतर्क रहें कारोबारी

माहेश्वरी ने कहा, यह सत्र केवल एक घंटे का है इसलिए नए कारोबारियों को इस दौरान सतर्कता बरतनी चाहिए क्योंकि बाजार में उतार-चढ़ाव आता रहता है। सेंकटम वैल्थ में उत्पादों एवं समाधानों के सह-प्रमुख मनीष जेलोका ने कहा कि संवत 2078 के दौरान भारतीय शेयर बाजारों ने वैश्विक बाजारों की तुलना में कहीं अच्छा प्रदर्शन किया था जो संवत 2079 में भी जारी रहने की उम्मीद है। शेयर बाजार 26 अक्टूबर को बंद रहेंगे।

कैसी रही थी 2021 की मुहुर्त ट्रेडिंग

बीते साल 4 नवंबर, 2021 को मुहूर्त ट्रेडिंग का आयोजन किया गया था. इस एक घंटे के सेशन में बीएसई का सेंसेक्स 60 हजार के ऊपर पहुंच गया था. मुहुर्त ट्रेडिंग पर सेंसेक्स 60,067 अंकों के स्तर पर, जबकि निफ्टी 17,921 के लेवल पर बंद हुआ था. हालांकि, साल 2022 में शेयर बाजार में खासी उथल-पुथल देखने को मिली है, लेकिन इसके बावजूद उम्मीद है मुहूर्त ट्रेडिंग के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी में जोरदार तेजी देखने को मिलेगी.

पांच दशक से ज्यादा पुरानी परंपरा

शेयर बाजार में दिवाली के दिन एक घंटे के लिए मुहूर्त ट्रेडिंग की परंपरा पांच दशक से ज्यादा पुरानी है। मुहूर्त ट्रेडिंग का चलन बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) में 1957 और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में 1992 में शुरू हुआ था। विशेषज्ञ बताते हैं कि मुहूर्त ट्रेडिंग पूरी तरह परंपरा से जुड़ी है। अधिकांश लोग इस दिन शेयर खरीदने को तरजीह देते हैं, हालांकि आमतौर पर ये इन्वेस्टमेंट काफी छोटे और प्रतीकात्मक होते हैं।

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