स्टॉक मार्केट में जब आप पैसे लगाते हैं तो ब्रोकरेज, एसटीटी (सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन फीस), एक्सचेंज ट्रांजैक्शन चार्ज, जीएसटी, सेबी चार्ज, स्टांप ड्यूटी जैसे टैक्स व चार्जेज चुकाने होते हैं और इन्हें काटकर ही शुद्ध मुनाफा या नुकसान आपको हासिल होता है. (Image- Pixabay)

शेयर बाजार में पैसा कमाने की सफल तकनीके|: RSI , VWAP , ATP, PCR मार्केट की शब्दावली व टेक्निकल इंडिकेटर्स की शानदार तकनीक। (Hindi Edition) किंडल संस्करण

यह पुस्तक शेयर बाजार की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है। इसमें बाजार की बारीकियों को समझने व क्या जानना आवश्यक एक व्यापारी के लिए है किस प्रकार आप एक अच्छे व्यापारी एक अच्छे निवेशक साबित हो सकते हैं शेयर बाजार में कौन से शेयर भरोसेमंद है जिसमें हमें ट्रेड करना चाहिए कितना मुनाफा रखना चाहिए कितना स्टॉप लॉस रखना चाहिए व्यापार की जुड़ी हुई शब्दावली का तथा टेक्निकल इंडिकेटर्स और विभिन्न प्रकार की व्यापार तकनीकों का वर्णन इस पुस्तक में किया गया है बाजार में कॉल पुट हेज तकनीक क्या होती है इसका का इस्तेमाल कैसे किया जाता है इस प्रकार से विभिन्न तकनीकों से हम बाजार में पैसा कमा सकते हैं बाजार की कौन सी जोखिमो हमें ध्यान रखना चाहिए। थिटा (समय हास) विशेष तकनीक है जिनका इस्तेमाल करके व्यापारी कमा सकता है। सही मायने में नए व्यापारियों के लिए बहुत ज्ञानवर्धक व फायदेमन्द साबित हो सकती है बाजार ट्रेन्ड के बारे में विश्व बाजार की जानकारी क्यो जरूरी है।कौन सी साधारण तकनीको के द्वारा शेयर बाजार में पैसा कमाया जा सकता है RSI , VWAP , ATP, PCR और भी बहुत सी महत्वपुर्ण इस पुस्तक में दी गई है। इसमें निफ़्टी बैंक निफ़्टी उस पर कॉल व पुट ऑप्शन कि कई तकनीकी दि गई है जिससे व्यापारी बाजार को समझ कर अपनी जोखिम को कम कर सकता है और कुछ पैसा भी वहां से बना सकता हो

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विकल्प (Options) ऑप्शन ट्रेडिंग - Options Trading

आपके द्वारा ऑप्शन ट्रेडिंग शुरू करने से पहले आप क्या पूर्ण करने की आशा रखते हैं, उसकी समझ होना बेहद जरूरी है. केवल तभी आप ऑप्शन ट्रेडिंग रणनीति पर ध्यान केंद्रित कर पाएंगे. आइये पहले ऑप्शन की अवधारणा को समझते हैं.

ऑप्शन की अवधारणा को इस उदाहरण से समझा जा सकता है. उदाहरण के लिए, जब आप कुछ संपत्ति खरीदने की योजना बनाते हैं, तो आपने अन्य ऑप्शन का मूल्यांकन करने क्या कॉल या पुट अधिक पैसा कमाते हैं? के दौरान उसे कुछ समय के लिए होल्ड करने के लिए नॉन-रिफंडेबल डिपॉजिट रखा हो सकता है.

यह ऑप्शन के प्रकार का उदाहरण है. उसी प्रकार, शायद आपने सुना हो कि बॉलीवुड किसी उपन्यास पर कोई ऑप्शन खरीद रहा है. किसी उपन्यास को ऑप्शन करने में निर्देशक पैसा रखा निर्दिष्ट दिनांक से पहले उपन्यास पर फिल्म बनाने के अधिकार खरीदता है. मकान और स्क्रिप्ट वाले दोनों मामलों में, किसी ने निश्चित दिनांक से पहले निश्चित मूल्य पर कोई उत्पाद खरीदने के अधिकार के लिए कुछ हैं. स्टॉक ऑप्शन खरीदना भी कुछ ऐसा ही है. ऑप्शन वे अनुबंध हैं जो निश्चित समय के भीतर धारक को निश्चित मूल्य पर निश्चित स्टॉक की तय मात्रा बेचने या खरीदने का अधिकार देते हैं. कोई पुट ऑप्शन धारक को प्रतिभूति बेचने का अधिकार देता है, कोई कॉल ऑप्शन प्रतिभूति खरीदने का अधिकार देता है. हलांकि इस प्रकार के अनुबंध धारक को अधिकार देते हैं, बल्कि निश्चित दिनांक से पहले निश्चित मूल्य पर स्टॉक व्यापार करने की कोई बाध्यता नहीं देते हैं. कई व्यक्तिगत निवेशक को ऑप्शन उपयोगी साधन लगता हैक्योंकि वे इसे निम्न तरह से उपयोग कर सकते हैं:

ए) लेवरेज के प्रकार के रूप में या

बी) बीमा के प्रकार के रूप में.

ऑप्शन में ट्रेड करना आपको शेयर का पूरा मूल्य दिए बिना शेयर के मूल्य से लाभ उठाने देता है. वे आपको पूर्ण रूप से शेयर खरीदने के लिए आवश्यक पैसों की तुलना में बेहद कम पैसों से स्टॉक के शेयर पर सीमित नियंत्रण प्रदान करते क्या कॉल या पुट अधिक पैसा कमाते हैं? हैं. बीमा के रूप में उपयोग किए जाने पर ऑप्शन आपको सीमित समय के लिए खरीदने या बेचने का अधिकार प्रदान करके किसी निश्चित प्रतिभूति के मूल्यों में उतार चढ़ाव से आपकी सुरक्षा करते हैं. ऑप्शन क्या कॉल या पुट अधिक पैसा कमाते हैं? स्वाभविक रूप से जोखिमभरा निवेश साधन है केवल अनुभवी एवं ज्ञानी निवेशकों के लिए उचित है जो कि बाजार स्थिति को करीब से देखने के लिए तैयार है और अनुमान लगाकर संभावित नुकसान उठाने के लिए वित्तीय रूप से तैयार हैं.

अलग-अलग प्रकार ऑप्शन क्या है? ऑप्शन को लाभ कमाने / हानि घटाने के लिए रणनीतिक उपाय के रूप में कैसे उपयोग किया जा सकता है?

अः ऑप्शन को निम्न प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता है:

जैसा कि पहले उल्लेख किया गया है, ऑप्शन के दो प्रकार हैं, कॉल और पुट. कॉल ऑप्शन धारक को समापन अवधि से पहले किसी भी समय स्ट्राइक मूल्य पर अंतनिर्हित स्टॉक खरीदने का अधिकार देता है. समान्य तौर पर, अंतनिर्हित साधनों का मूल्य बढ़ने पर कॉल ऑप्शन का मूल्य भी बढ़ता है..

इसके विपरीत पुट ऑप्शन समापन दिनांक को या उसके पहले स्ट्राइक मूल्य पर धारक को अंतर्निहित शेयर बेचने का अधिकार प्रदान करते हैं. अंतर्निहित साधनों का मूल्य कम होने पर पुट ऑप्शन का मूल्य बढ़ता है.

पुट ऑप्शन वह है जिसमें कोई व्यक्ति बाद में होने वाली मूल्य गिरावट के लिए कोई स्टॉक सुनिश्चित कर सकता है. यदि आपके स्टॉक का मूल्य कम होता है, तो आप अपना पुट ऑप्शन लेकर इसे पूर्व में निर्धारित मूल्य स्तर पर बेच सकते हैं.यदि स्टॉक मूल्य ऊपर जाता है, तो आपको बस केवल चुकायी गई प्रीमियम राशि की हानि होती है. ध्यान रखें कि समाचार पत्रों और ऑनलाइन उदाहरणों में आप कॉल को सी के रूप में और पुट को पी के रूप में संक्षिप्त किया

नीचे दिए उदाहरणों में पुट ऑप्शन का स्पष्ट रूप से वर्णन किया गया है: केस 1: राजेश ने मई इंफ़ोसिस टेक्नोलॉजिस मई 3000 पुट का 1 लोट खरीदता है और 250 का प्रीमियम देता है,

यह अनुबंध राजेश को वर्तमान दिनांक से मई के अंत तक 3000 रुपए के 100 शेयर खरीदने देता है. इसका लाभ उठाने के लिए, राजेश को बस 25000 रुपए का प्रीमियम देना है ( 250 रुपए एक शेयर के लिए कुल 100 शेयर). पुट के खरीदार ने बेचने का अधिकार खरीद लिया है. पुट के स्वामी के पास बेचने का अधिकार हैं.

केस 2:यदि आप सोचते हैं कि कोई विशेष स्टॉक जैसे रे टक्नोलॉजिस” का फरवरी के महीने में मूल्य अधिक है, और भविष्य में मूल्यों में सुधार हो सकता है. हालांकि आप मूल्य बढ़ने के मामले में कोई खतरा नहीं उठाना चाहते हैं. तो आपके लिए सबसे अच्छा विकल्प स्टॉक पर पुट ऑप्शन लेना रहेगा. मान लीजिए स्टॉक के लिए भाव इसके अंतर्गत हैं:

1050 रुपए 10 पर मई पुट 1070 रुपए 30 पर मई पुट

इसलिए आपने स्ट्राइक मूल्य 1070 और पुट मूल्य 30 रुपए पर 1000 रे टेक्नोलॉजिस” पुट खरीदे

If you want to put a joining line, then learn to ask such questions जॉइनिंग की लाइन लगानी है तो ऐसे सवाल करना सीखिए

If you want to put a joining line, then learn to ask such questions. आज के इस लेख में मैं आप सभी को बताऊंगा कि अगर आप ज्यादा से ज्यादा लोगों को ज्वाइन करना चाहते हैं तो आपको उन लोगों से किस तरह से सवाल करना चाहिए कौन सा सवाल आपको उन लोगों से करना चाहिए?

आपसे भी कई बार वो लोग मिले होंगे जो आपसे यही बोलते होंगे कि इस नेटवर्क मार्केटिंग बिजनेस में तो सिर्फ ऊपर वाले ही पैसे कमाते हैं जो नीचे रहते हैं वह सिर्फ काम करते रह जाते हैं ,

तो आप उन लोगों से यह बोलिए कि हां यह बात तो सच है कि ऊपर वाले कमाते हैं।

If you want to put a joining line, then learn to ask such questions

क्योंकि ऊपर वाले लोग अपना कम से कम 12 से 15 साल दिए हैं।

और आपको तो क्या कॉल या पुट अधिक पैसा कमाते हैं? अभी कुछ दिन भी नहीं हुआ जॉइनिंग किए हुए तो आप कहां से कमाएंगे?

आपके हिसाब से क्या ऊपर वालों को नहीं कमाना चाहिए ?

और अगर आप भी जो लोगों उपर हैं उन लोगों के जितना कमाना चाहते हैं तो आपको कौन मना किया है ऊपर आने से ,

आप भी उतना टाइम दीजिए और अगर आपको उतना टाइम नहीं देना है उन लोग से जल्दी इतना पैसा कमाना है तो आप वही काम कीजिए जो काम वो आपसे बोल रहे हैं और आप भी ऊपर आ जाइए आप भी ज्यादा पैसा कमाएंगे।

आप यह भी बोल सकते हैं की उन लोगों से कि अगर आपको पता है कि इसमें जो सीनियर होते हैं वह ज्यादा पैसा कमाते हैं तो आप भी ज्यादा मेहनत कीजिए और आप सीनियर बन जाइए आप भी ज्यादा पैसा कमाएंगे।

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और यहां पर मैं आप सभी को एक और बात बताना चाहूंगा कि आपको लोगों से ज्यादा से ज्यादा सवाल करना चाहिए, आपको लोगों को समझाना छोड़ना होगा और सवाल करना शुरू करना।

क्योंकि जब आप लोगों से सवाल करना शुरू कर देंगे तो उनको उस सवाल का जवाब मिल जाएगा।

जिस दिन आप सवाल करने की कला सीख जाएंगे उस दिन से आप ज्यादा से ज्यादा लोगों को अपने साथ कनेक्ट कर पाएंगे, आप किसी को भी समझाने की कोशिश मत कीजिए।

जब कोई आपसे सवाल कर रहा है तो आप उस सवाल के बदले सवाल क्या कॉल या पुट अधिक पैसा कमाते हैं? कीजिए उसको अपने सवाल का जवाब अपने आप ही मिल जाएगा।

जब कोई आपसे यह बोले कि इस बिजनेस में तो सिर्फ सीनियर ही पैसा कमाते हैं ,

तो आप यह बोलिए कि अगर आपको यह पता है कि इसमें सिर्फ सीनियर ही पैसा कमाते हैं तो आप क्यों नहीं सीनियर बन जा रहे हैं आपको कौन रोका है सीनियर बनने से ?

और आप यह बात भी उनको समझाने की कोशिश कीजिए कि जो लोग आज सीनियर बने हैं,

जो लोग आज टॉप लेवल पर हैं क्या वह लोग पहले से ही टॉप लेवल पर थे ,

क्या वह लोग पहले दिन से ही सीनियर बन चुके थे ,

नेटवर्क मार्केटिंग की कम्पलीट फॉलो-अप गाइड हिंदी E-Book की अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक कीजिये

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आप उनको यह समझाइए कि आप इस बात को समझने की कोशिश कीजिए कि जितने भी लोग आज नेटवर्क मार्केटिंग बिजनेस में टॉप लेवल पर पहुंचे हैं वो लोग भी कभी सबसे नीचे थे।

और वह लोग मेहनत किए अपना टीम बनाएं तब जाकर टॉप लेवल पर पहुंचे हैं और वह आज सीनियर बने हैं।

आप उनको यह समझाइए कि अगर आज आप ज्वाइन कर लेते हैं तो आपके साथ जितने भी लोग जॉइन होंगे वह आपके नीचे होंगे और आप उन लोगों से ऊपर होंगे उन लोगों का सीनियर होंगे और आप उन लोगों से ज्यादा पैसा कमाएंगे।

जो लोग आपसे यह सवाल करते हैं कि इसमें तो पहले से ही ऊपर लोग हैं तो अगर मैं आज जुडूंगा तो मैं उन लोग से नीचे हो जाऊंगा ,

तो आप यह बताइए कि ऊपर कोई भी आता नहीं है वह अपनी टीम के अंदर नेटवर्क बनाता है तब ऊपर आता हैं।

नेटवर्क मार्केटिंग या डायरेक्ट सेल्लिंग की सम्पूर्ण गाइड और वर्कशॉप क्या कॉल या पुट अधिक पैसा कमाते हैं? पॉवरपॉइंट फाइल की अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक कीजिये

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क्योंकि जितने भी लोग उपर हैं वह ऊपर वाले भी शुरुआती दौर में नीचे ही थे और धीरे-धीरे करके अपना नेटवर्क बनाए और ऊपर पहुंचे हैं।

आप लोगों को यह समझाने की कोशिश कीजिए कि जो उपर रहते हैं वह ज्यादा कमाते हैं तो उनको देखकर ही ज्यादा से ज्यादा लोग जुड़ते हैं और ज्यादा मेहनत करके वह लोग भी उनके जैसे टॉप लेवल पर जाना चाहते हैं।

क्योंकि जो टॉप लेवल पर हैं वह पैसे नहीं कमाएंगे तो जो नए लोग जुड़ेंगे वह लोग यह बोलेंगे कि जब तुम्हारे सीनियर ही पैसा नहीं कमा रहे हैं तो तुम क्या कमाते हो और मैं क्या कमा पाऊंगा ?

तो अगर आप नेटवर्क मार्केटिंग बिजनेस में हैं तो आपको भी बहुत लोग ऐसे मिलेंगे जो यह बोलेंगे कि इसमें सिर्फ टॉप लेवल वाले लोग ही पैसा कमाते हैं मुझे ज्वाइन नहीं होना है मुझे काम नहीं करना है।

और बहुत लोग ऐसे भी मिलेंगे जो आपसे यह बोलेंगे कि जिस दिन तुम्हारा चेक बन जाएगा उस दिन दिखाना उस दिन से मैं इस बिजनेस को जॉइन करूंगा।

तो जब इस तरह के सिचुएशन आपके सामने आए तो आपको उसी को एक कारण बना लेना है और इस नेटवर्क मार्केटिंग इंडस्ट्री टॉप लेवल पर पहुंच कर दिखाना है।

यदि आप सभी को आज का हमारा यह लेख (If you want to put a joining line, then learn to ask such questions जॉइनिंग की लाइन लगानी है तो ऐसे सवाल करना सीखिए) पसंद आया हो तो कृपया करके आप सभी हमारे इस लेख को अपने टीम के हर मेंबर के साथ जरूर शेयर करें।

ताकि वह सभी लोग भी (If you want to put a joining line, then learn to ask such questions जॉइनिंग की लाइन लगानी है तो ऐसे सवाल करना सीखिए) के बारे में समझ सके और दूसरों को समझा सके।

Income Tax on Share Market Earning: जानिए शेयर बाजार से हुई कमाई पर कैसे लगता है इनकम टैक्स, समझ लेंगे तो होगा फायदा ही फायदा!

Income Tax on Share Market Earning: शेयर बाजार से हुई कमाई (Share Market Earning) के साथ-साथ उस पर लगने वाले इनकम टैक्स (Income Tax) की जानकारी होना भी जरूरी है। अलग-अलग तरह की कमाई पर अलग-अलग दर से टैक्स (Taxation on Share Market Earning) लगता है। अगर आप शेयर बाजार से हुई कमाई पर इनकम टैक्स का सही कैल्कुलेशन (Income Tax Calculation on Share Market Earning) नहीं कर पाएंगे, तो आपको नुकसान हो सकता है। आइए जानते हैं शेयर बाजार से हुई कमाई पर कैसे और कितना लगता है टैक्स।

how taxation done on earnings from share market, see how much income tax you have to pay

Income Tax on Share Market Earning: जानिए शेयर बाजार से हुई कमाई पर कैसे लगता है इनकम टैक्स, समझ लेंगे तो होगा फायदा ही फायदा!

इंट्रा-डे और फ्यूचर-ऑप्शन ट्रेडिंग से हुई कमाई पर टैक्स

शेयर बाजार में अगर आप एक ही दिन में शेयर खरीद कर उसी दिन शाम तक बेच देते हैं तो इसे इंट्रा-डे ट्रेडिंग कहा जाता है। इस तरह से हुई कमाई को स्पेक्युलेटिव बिजनस इनकम कहा जाता है। वहीं फ्यूचर और ऑप्शन ट्रेडिंग से हुई कमाई को नॉन-स्पेक्युलेटिव बिजनस इनकम कहा जाता है। इंट्रा-डे और फ्यूचर-ऑप्शन ट्रेडिंग से हुई कमाई पर आपको टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स देना होता है। यानी 2.5 लाख रुपये तक की कुल कमाई पर कोई टैक्स नहीं लगेगा, उसके ऊपर टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगेगा।

शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन पर टैक्स

अगर आप शेयर बाजार में 1 साल से कम और 1 दिन से अधिक के लिए शेयर खरीदते हैं तो इससे हुए कमाई शॉर्ट टर्म कैपिल गेन कहलाती है। शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन पर आपको फ्लैट 15 फीसदी टैक्स देना होता है। हालांकि, अगर आपकी कुल कमाई 2.5 लाख रुपये तक ही है, तो आपको कोई टैक्स नहीं चुकाना होता है। इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ेगा कि आप कौन से टैक्स स्लैब में आते हैं।

लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर टैक्स

अगर शेयर बाजार में आप 1 साल से अधिक की अवधि के लिए शेयर खरीदते हैं तो 1 साल बाद उसे बेचने से हुई कमाई लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन कहलाती है। लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर 1 लाख रुपये तक की कमाई पर कोई टैक्स नहीं लगता है, जबकि उससे अधिक की कमाई पर फ्लैट 10 फीसदी का टैक्स लगता है। इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप किस टैक्स स्लैब में आते हैं। हालांकि, अगर आपकी कुल कमाई 2.5 लाख रुपये तक ही है, तो आपको कोई टैक्स नहीं चुकाना होता है।

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Stock Market Trading: इन तरीकों से बढ़ा सकते हैं स्टॉक मार्केट से कमाई, जानिए कैसे घट जाता है वास्तविक मुनाफा

Stock Market Trading: स्टॉक मार्केट में कारोबार करते हैं तो सभी चार्जेज को आसानी से समझें ताकि मुनाफा बढ़ा सकें. मुनाफे के मामले में एनएसई और बीएसई पर ट्रेडिंग में भी फर्क है.

Stock Market Trading: इन तरीकों से बढ़ा सकते हैं स्टॉक मार्केट से कमाई, जानिए कैसे घट जाता है वास्तविक मुनाफा

स्टॉक मार्केट में जब आप पैसे लगाते हैं तो ब्रोकरेज, एसटीटी (सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन फीस), एक्सचेंज ट्रांजैक्शन चार्ज, जीएसटी, सेबी चार्ज, स्टांप ड्यूटी जैसे टैक्स व चार्जेज चुकाने होते हैं और इन्हें काटकर ही शुद्ध मुनाफा या नुकसान आपको हासिल होता है. (Image- Pixabay)

Stock Market Trading: अगर आप स्टॉक मार्केट में कारोबार करते हैं और शेयरों की सक्रिय रूप से खरीद-बिक्री करते हैं तो इससे जुड़े चार्जेज के बारे में पहले से कैलकुलेशन कर लेना चाहिए. यह कैलकुलेशन इसलिए जरूरी है क्योंकि इससे मुनाफा बढ़ाने में मदद मिलती है. इक्विटी में जब आप पैसे लगाते हैं तो यह इंट्रा-डे होता है या डिलीवरी या फ्यूचर या ऑप्शंस, इन सभी तरीकों में पैसे लगाने पर मुनाफा अलग-अलग हासिल होता है. स्टॉक मार्केट में जब आप पैसे लगाते हैं तो ब्रोकरेज, एसटीटी (सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन फीस), एक्सचेंज ट्रांजैक्शन चार्ज, जीएसटी, सेबी चार्ज, स्टांप ड्यूटी जैसे टैक्स व चार्जेज चुकाने होते हैं और इन्हें काटकर ही शुद्ध मुनाफा या नुकसान आपको हासिल होता है.

इन चार तरीकों से होती है ट्रेडिंग

  • Intra-Day Equity: जब आप शेयर की खरीद-बिक्री यानी लांग या शॉर्ट पोजिशन सिर्फ एक ही दिन के लिए लेते हैं यानी कि आज ही खरीदकर बेच दिया तो यह इंट्रा-डे के तहत माना जाता है. इसमें इक्विटी की होल्डिंग नहीं मिलती है.
  • Delivery Equity: इंट्रा-डे के विपरीत डिलीवरी ट्रेडिंग में आप जो शेयर खरीदते हैं, उसे डीमैट खाते में रखा जाता है और इसकी होल्डिंग कुछ समय के लिए मिलती है. इंट्रा-डे में चाहे घाटा हो या फायदा, पोजिशन को स्क्वॉयर ऑफ करना जरूरी होता है, जबकि डिलीवरी इक्विटी ट्रेडिंग में अपने हिसाब से जब चाहें किसी भी कारोबारी समय पर शेयरों की बिक्री कर सकते हैं.
  • Future: यह खरीदार और विक्रेता के बीच एक वायदा है जिसके तहत एक खास दिन निश्चित प्राइस पर स्टॉक्स का लेन-देन होता है. सौदा हो जाने के बाद दोनों ही पार्टियों को इस सौदे को पूरा करना अनिवार्य है और कोई भी पक्ष मुकर नहीं सकता है.
  • Options: ऑप्शंस के तहत किसी खास दिन निश्चित प्राइस पर लेन-देन के लिए एक सौदा होता है जिसमें कुछ प्रीमियम चुकाना होता है. ऑप्शंस के तहत कॉल और पुट दो विकल्प मिलते हैं. कॉल ऑप्शंस के तहत खरीदार को खरीदने का अधिकार मिलता है और पुट ऑप्शंस के तहत बेचने का.

Stock Market: बाजार खुलते ही निवेशकों के डूबे 3.5 लाख करोड़, सेंसेक्‍स 500 अंक टूटा, ये हैं टॉप लूजर्स

मुनाफे पर ऐसे पड़ता है असर

ऊपर चार तरीकों के बारे में जानकारी दी गई जिससे आप शेयर मार्केट के जरिए पैसे कमाते हैं. अब नीचे देखते हैं कि आपको सभी तरीके से कितना मुनाफा हो रहा है-

  • मान लेते हैं कि आप किसी कंपनी के 1 हजार रुपये के 400 शेयरों को खरीदकर इंट्रा-डे में ही 1100 रुपये में बेच देते हैं तो कुल टर्नओवर 8.40 लाख रुपये का हुआ. इस पर ब्रोकरेज, एसटीटी, एक्सचेंज ट्रांजैक्शन फीस, जीएसटी, सेबी शुल्क और स्टांप ड्यूटी मिलाकर करीब 202.24 रुपये टैक्स व चार्जेज के रूप में चुकाने होंगे. इस ट्रेडिंग में आपको 39795.76 रुपये का मुनाफा होगा.
  • अगर आप 1 हजार रुपये के 400 शेयरों को खरीदकर डिलीवरी लेते हैं यानी कि उनकी बिक्री किसी और दिन 1100 रुपये के भाव पर करते हैं तो कुल टर्नओवर 8.40 लाख रुपये का हुआ लेकिन टैक्सेज व चार्जेज के रूप में 935.04 रुपये चुकाने होंगे. इसमें 39064.96 रुपये का मुनाफा हुआ जो इंट्रा-डे ट्रेडिंग से कम है. हालांकि इंट्रा-डे में बहुत रिस्क है क्योंकि इसमें मुनाफा हो या नुकसान, पोजिशन को स्क्वॉयर ऑफ क्या कॉल या पुट अधिक पैसा कमाते हैं? करना ही होगा.
  • फ्यूचर के मामले में अगर आपने 400 शेयरों को 1000 रुपये में खरीदकर 1100 रुपये में बेचा है तो 8.4 लाख रुपये के टर्नओवर वाले इस ट्रांजैक्शन में 119.86 रुपये का टैक्स व चार्जेज चुकाने होंगे. इसमें 39880.14 रुपये का मुनाफा होगा.
  • अगर ऑप्शंस के तहत 1 हजार रुपये के 400 शेयरों के लिए सौदा किया है जिसकी बिक्री 1100 रुपये के भाव पर होती है तो 8.4 लाख रुपये के टर्नओवर के इस सौदे में 805.38 रुपये टैक्स व चार्जेज के रूप में चुकाने होंगे. इसमें 39194.62 रुपये का मुनाफा होगा.
    (यह कैलकुलेशन ब्रोकरेज फर्म Zerodha के कैलकुलेटर से किया गया है और इसमें एनएसई- नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेडिंग का कैलकुलेशन है. सभी फर्मों के लिए ब्रोकरेज जैसे चार्जेज भिन्न होते हैं.)

F&O ट्रेडिंग में BSE पर NSE की तुलना में अधिक मुनाफा

Zerodha कैलकुलेटर के मुताबिक अगर आप एनएसई की बजाय बीएसई पर फ्यूचर एंड ऑप्शंस ट्रेडिंग करते हैं तो मुनाफा बढ़ सकता है. बीएसई पर F&O के लिए कोई एक्सचेंज ट्रांजैक्शन फीस नहीं लगता है और इससे जीएसटी भी कम हो जाता है. ध्यान रहे कि इंट्रा-डे इक्विटी और डिलीवरी इक्विटी में बीएसई पर एक्सचेंज ट्रांजैक्शन फीस एनएसई के बराबर ही चुकानी होती है.

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